Parag - Laleshwari's Verses (Lal Vakh) By Pushkar Nath Raina


  • Product Code: KB-277


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  • ₹399.00

Book Details
Author Sh. Poshkar Nath Raina
Publisher Jandiyal
ISBN 81-85217-23-8
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‘परमा — लल्द्यदरी वाख्य (सल वाख्य)’ कश्मीर की महान संत-कवयित्री लल्लेश्वरी की पवित्र वाणी और उनके आध्यात्मिक चिंतन को प्रस्तुत करने वाली महत्वपूर्ण हिन्दी पुस्तक है। लेखक पुष्कर नाथ रैना ने लल्द्यद के वाखों को एक नवीन प्रयोग के साथ प्रस्तुत किया है तथा भाषा-टीका के माध्यम से उनके गूढ़ आध्यात्मिक और दार्शनिक अर्थों को समझने का प्रयास किया है।

लल्लेश्वरी कश्मीर की आध्यात्मिक एवं साहित्यिक परंपरा की अत्यंत महत्वपूर्ण संत-कवयित्री मानी जाती हैं। उनके वाखों में आत्मज्ञान, अध्यात्म, ईश्वर-साक्षात्कार, जीवन-दर्शन और मानवीय चेतना के गहन विचार मिलते हैं। यह पुस्तक पाठकों को लल्द्यद की वाणी को समझने और कश्मीर की समृद्ध संत-साहित्य परंपरा से परिचित होने का अवसर प्रदान करती है।

पुस्तक के लेखक पुष्कर नाथ रैना का जन्म 1936 ई. में कश्मीर के एक गाँव लारीयार में हुआ। उन्होंने शिक्षा विभाग में अध्यापक के रूप में कार्य किया और दिसम्बर 1986 में सेवानिवृत्त हुए। भारतीय संस्कृति, महाभारत, रामायण, गीता तथा कश्मीरी साहित्य में उनकी विशेष रुचि रही है। उन्होंने कश्मीर के इतिहास और संस्कृति पर भी लेखन किया है।

मुख्य विशेषताएँ:

  • लल्द्यद के वाखों का संकलन

  • नवीन प्रयोग के साथ प्रस्तुति

  • भाषा-टीका सहित

  • कश्मीर की संत एवं काव्य परंपरा का परिचय

  • आध्यात्मिक, दार्शनिक और साहित्यिक दृष्टि से उपयोगी

  • कश्मीर के साहित्य, संस्कृति और इतिहास में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए महत्वपूर्ण

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परमा लल्द्यदरी वाख्य | लल्द्यद के वाख | पुष्कर नाथ रैना

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